शनिवार, 27 सितंबर 2014

Bikhre Lafz-4 ; 11 July2013

दिल्ली ना तो बुद्ध के लिए उपयुक्त जगह है और ना ही बुद्धू के लिए. मैं ठहरा निपट बुद्धू तो भला मैं कैसे टिक सकता हूँ यहाँ. जा रहा हूँ फिर से कुछ दिनों के लिए. जो जगह बुद्ध को रास आया था वहीं प्रस्थान कर रहा हूँ. बुद्ध के पदचिन्ह खोजने का प्रयास करूँगा. उस मगध को भी थोङा बहुत खोज ही लूँगा इसी प्रयास में जो स्मृतियों में ही जिंदा बचा है.
क्या पता मेरे जन्मस्थान में ही मेरा भी बुद्धत्व भटक रहा हो.!! वैसे भी बुद्धूवत्व का कुछ भी अंश तिलांजलित होकर बुद्धत्व का रूप ग्रहण कर ले तो ये यायावरी सफल सिद्ध हो जाएगी. .

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