उसने कहा था
उसने कहा था,
हम बनायेंगे एक जहां,
हम बसायेंगे एक जहां,
जहाँ गम न होगी,
खुशियाँ किसी को न ज्यादा न कम होगी,
कुछ दिनों के बाद,
वक़्त के थपेड़ों को झेल लेने के बाद,
जब समय ने लिए करवट,
उसने शुरू किया कुछ हरकत,
रिश्ते में तल्खी आई,
कडवाहट ने की मिठास की भरपाई,
कुछ दोषी हम भी थे,
पर निर्दोष वो भी कहाँ थे,
वो भी भूली वादे,
हम भी भुलाने लग गए,
शुरू हुवा फिर से प्यालों का दौर,
वादों को धुंवे में उड़ाने का दौर,
अब जब आया है पुराने साल का अवसान,
नए साल ने खींचा हमारा ध्यान,
नयी शुरुवात करने की कसम लेते हैं,
आपको भी मिले नयी शुरुवात हम दुवा करते हैं.