माना कि मंदिर के मूर्ति पर चढ़ने वाले फूल बङे इज्जतदार हो जाते हैं, पर मंदिर के नींव में पङे उपेक्षित ईंटों की प्रासंगिकता को नज़रअंदाज़ न करिए। हम तो नींव में पङे, सीढ़ियाँ बने, स्तंभों को संभाले ईंट-पत्थर ही बनना पसंद करेंगे। देशभक्ति के पैमानों में पाकिस्तानी-चीनी को गोली मारना या गरियाना ही गिनते आए हैं आप। अब सुधरिए और अपने पैमानों को भी सुधारिए। इन हाथों में कलम भी बङे अच्छे लगते हैं।
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