शनिवार, 27 सितंबर 2014

Bikhre Lafz-13; 26 December 2013

पूस के दोपहरी में होती धूप की बारिश जैसा अहसास होता है, जब वो खुले आँखों के भी सपने में अपने साथ होते हैं। पर जब वापस अपने में लौट आता हूँ तब पूस की रात को ही अपने पास पाता हूँ। सच कहता हूँ...तुम्हारी क़सम, तुम्हारा यूँ बरस जाना अपने-आप में बेहोङ है। मेरे कल्पना से कभी होङ करो तो मानें!

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