मुझे भी,
पहले कभी,
नदी कहा जाता था,
अब...
मेरा नाम भी,
और मेरा काम भी,
बदल दिया,
तुम्हारे स्वार्थ ने ।।
©:- सुभाष सिंह 'सुमन'...।।
पहले कभी,
नदी कहा जाता था,
अब...
मेरा नाम भी,
और मेरा काम भी,
बदल दिया,
तुम्हारे स्वार्थ ने ।।
©:- सुभाष सिंह 'सुमन'...।।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें