देव या देवतुल्य होने की स्वघोषणा ही ब्राह्मणवाद है. ध्यान से देखिए तो हर देश-काल में यह प्रवृत्ति स्पष्ट दिख जाएगा. पौराणिक ब्राह्मणों ने भारत में स्वयं को पृथ्वी पर देवताओं का प्रतिनिधि घोषित करके जो अंधेर कायम किया था उसे शिखर तक पहुँचाने में मोहम्मद-मसीह जैसे पैगम्बरों का स्पष्ट योगदान है. साफ शब्दों में कहूँ तो इस्लाम ब्राह्मणवाद का अरबी संस्करण मात्र है. जिस तरह प्राचीन और मध्य काल के विभिन्न राजाओं-सुल्तानों आदि ने अपने सत्ता-स्वार्थ में 'राजत्व का सिद्धांत'('थ्योरी ऑफ किनशिप') प्रतिपादित किया था उसी तरह इनलोगों ने भी जनशोषण को 'थ्योरी ऑफ ब्राह्मणशिप' और 'थ्योरी ऑफ प्रोफेटशिप' प्रतिपादित किया.
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