गुरुवार, 6 जनवरी 2011

उसने कहा था

उसने कहा था,
हम बनायेंगे एक जहां,
हम बसायेंगे एक जहां,
जहाँ गम न होगी,
खुशियाँ किसी को न ज्यादा न कम होगी,
कुछ दिनों के बाद,
वक़्त के थपेड़ों को झेल लेने के बाद,
जब समय ने लिए करवट,
उसने शुरू किया कुछ हरकत,
रिश्ते में तल्खी आई,
कडवाहट ने की मिठास की भरपाई,
कुछ दोषी हम भी थे,
पर निर्दोष वो भी कहाँ थे,
वो भी भूली वादे,
हम भी भुलाने लग गए,
शुरू हुवा फिर से प्यालों का दौर,
वादों को धुंवे में उड़ाने का दौर,
अब जब आया है पुराने साल का अवसान,
नए साल ने खींचा हमारा ध्यान,
नयी शुरुवात करने की कसम लेते हैं,
आपको भी मिले नयी शुरुवात हम दुवा करते हैं.

2 टिप्‍पणियां:

बेनामी ने कहा…

subhash tum hare kavita bhut he achhi he

बेनामी ने कहा…

subhash tum hare kavita bhut he achhi he