नेताजी सुभाष को समर्पित...
आज फिर से नींव दरक रही है,
हाथों से हमारी आजादी सरक रही है,
घटा की तरह कोई हमपे छ रहा है,
हा देव! क्या फिर से अंधकार आ रहा है?
इस अँधेरे के अवसान को अन्लपुन्ज दिला दे,
या फिर मेरे सुभाष को संजीवनी पिला दे.....
JAI HIND...........
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