बुधवार, 17 फ़रवरी 2010

शहीद भगत सिंह को मेरी भेंट--

१)आखिर क्यूँ हुवा तू बलिदान भगत सिंह?
सस्ती थी क्या इतनी तेरी जन भगत सिंह
जिस देश के खातिर तू हो गया कुर्बान
खतरे में है आज वो हिंदुस्तान भगत सिंह........

२)आज की युवा पीड़ी जो की देश का भविष्य है
उस वर्तमान के भविष्य पे संशय है
सड़कों पे बिकती है संस्कार भगत सिंह
खतरे में है आज वो हिंदुस्तान भगत सिंह........

३)कहने को तो तू युवाओं का आदर्श है
पर कायरता तो कभी नहीं तेरा परामर्श है
भीरु हो गया आज का वर्तमान भगत सिंह
खतरे में है आज वो हिंदुस्तान भगत सिंह........

४)वो लोग जो खुद को तेरा अनुयायी कहते हैं
तेरे सिध्हंतों का कभी न अनुसरण करते हैं
तेरे फोटो का तो बस करते हैं इस्तेमाल भगत सिंह
खतरे में है आज वो हिंदुस्तान भगत सिंह........

५)तेरे तस्वीर पे फुल-माला तो बस औपचारिकता हो गयी है
तेरे आदर्शों का पालन तो बस मुर्खता हो गयी है
युवा-पीडी को है काहन इतना अवकाश भगत सिंह
खतरे में है आज वो हिंदुस्तान भगत सिंह........

६)आज की युवा पीडी जो बस बुर्गेर-पिज्जा खाती है
बीयर-सिगरेट पी कर जरा न अघाती है
अंग्रेजी में करती है हिंदी की बात भगत सिंह
खतरे में है आज वो हिंदुस्तान भगत सिंह........

७)यहाँ तो बस अब जिस्म की नुमाईश होती है
लाखों पथभ्रष्टों की रोज पैदाइश होती है
बेच रहे हैं वो भारत का सम्मान भगत सिंह
खतरे में है आज वो हिंदुस्तान भगत सिंह........

८)गाँधी-नेहरु ने तो तुझे फंसी पे लटकवाया
उसके नाजायज औलादों ने तेरे विचारों को दबाया
तेरे कथित अनुयायियों को भी,है नहीं तेरी परवाह भगत सिंह
खतरे में है आज वो हिंदुस्तान भगत सिंह........

९)जिस कथित आज़ादी के लिए तू मरा था
तूफ़ान में भी कश्ती लेकर सागर से जा भिड़ा था
उस आज़ादी का तो हो गया बंटाधार भगत सिंह
खतरे में है आज वो हिंदुस्तान भगत सिंह........

१०)हमे तो ये बेवकूफ-बदमाश कहते हैं
तुम्हे भी ये लोग इतिहास कहते हैं
बन रहा ये देश फिर से गुलाम भगत सिंह
खतरे में है आज वो हिंदुस्तान भगत सिंह........

११)गीदड़ों के हाथ में सत्ता चली गयी है
आश्चर्य नहीं सर्कार तुझे भूल गयी है
'शेर को याद रख ले ' गीदड़ों के नहीं है ये औकात भगत सिंह
हमारे दिल में है तेरा पवित्र स्थान भगत सिंह
खतरे में है आज वो हिंदुस्तान भगत सिंह........

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-धन्यवाद
सुभाष कुमार सुमन,
(इकाई-अध्यक्ष, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद्, दयाल सिंह कॉलेज, दिल्ली विश्वविधालय )

JAI HIND...........

2 टिप्‍पणियां:

A K Singh ने कहा…

kya khub likha hai subhash g aapne dil khus ho gaya jajwat ka sath mai salam karta hu aapke is ksvita ko
jai hind

सुभाष सिंह 'सुमन' ने कहा…

dhanyawaad bhaisaab.......